सारी तसवीरें खोखली थी , सब वादे खाली थे
पर और कोई क्यों जाने वो जो मैंने देखा l
न तुमने प्यार किया न यारी समझी, हम पे भी एक रक्म लगा के बेच दिया l
सदियां गुज़र रही हैं , जब भी कोई बखाने सुन जग उठता है ,
मैं मन में सोच हँस पड़ती हूँ, तुम कितने गरीब होगे .
No idea what this says but I’m sure it’s great.
I just love ur writing. And this is something outstanding. All the best
Short but right on point…